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मार्गदर्शिका

फिल्म प्र्र्र्रमाणन की मार्गदर्षिका

चलचित्र अधिनियम के अनुसार वह फिल्म प्रमाणित नहीं करना चाहिए जिसके किसी भाग में भारत की प्रभुसत्ता और अखंड़ता पर संदेह व्यक्त करता हो , देष की सुरक्षा जोखिम या खतरे में पड़ सकती हों , विदेषों से मैत्रीपूर्ण संबंधों, कानून व्यवस्था, किसी व्यष्टि या व्यष्टि-निकाय या न्यायालय की मानहानि या अवमानना होती हो

धारा 5 ख ; 2द्ध द्वारा प्रदत्त षक्तियों का प्रयोग करते हुए, और भारत सरकार ने निम्नलिखित अधिसूचना जारी किए है।

1.    फिल्म प्रमाणीकरण का उद्धेष्य यह सुनिष्चित करना होगा कि:

(क)    फिल्म माध्यम समाज के मूल्यों और मानकों के प्रति उत्तरदायी और संवेदनषील बना रहें

(ख)    कलात्मक अभिव्यक्ति और सर्जनात्मक स्वतंत्रता पर असम्य्क रूप से रोक न लगाई जाए

(ग)    प्रमाणन-व्यवस्था सामाजिक परिवर्तन के प्रति उत्तरदायी हो

(घ)    फिल्म माध्यम स्वच्छ और स्वस्थ मनोरंजन प्रदान करेंः और

(ड़)  यथासंभव फिल्म सौंदर्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण और चलचित्र की दृष्टि से अच्छे स्तर की हो ।

2.    उपर्युक्त उद्धेष्यों के अनुसरण में फिल्म प्रमाणीकरण बोर्ड यह सुनिष्चित करेगा कि

1द्ध   हिंसा जैसी समाज विरोधी क्रियाएं उत्कृष्ट या न्यायोचित न ठहराई जाएं

;2द्ध   अपराधियों की कार्यप्रणाली, अन्य दृष्य या षब्द जिनसे कोई अपराध का करना उद्धीप्त होने की संभावना हो, चित्रित न की जाए

;3द्ध   ऐसे दृष्य न दिखांए जाएं जिनमें:-

(क)  बच्चों को हिंसा का षिकार या अपराधकर्ता के रूप में, अथवा हिंसा के बलात दर्षक के रूप में षरीक होेते दिखाया गया हो या बच्चों का किसी प्रकार दुरूपयोग किया गया हो:

(ख) षारीरिक और मानसिक रूप से विकलांब व्यक्तियों के साथ दुव्र्यवहार किया गया हो अथवा मजाक उड़ाया गया हो: और

(ग) पषुओं के प्रति क्रूरता या उनका दुरूपयोग के दृष्य अनावष्यक रूप से न दिखाए जाए ।

4   मूलतः मनोरंजन प्रदान करने के लिए हिंसा,क्रूरता और आतंक के निरर्थक या वर्जनीय दृष्य और ऐसे दृष्य न दिखाए जाएं जिनसे लोग संवेदनहीन या अमानवीय हो सकते हो:

5   वे दृष्य न दिखाए जाएं जिनमें मद्यपान को उचित ठहराया गया हो या उसका गुणगान किया गया हो ।

6  नषीली दवाओं के सेवन को उचित ठहराने वाले या उनका गुणगान करनेवाले दृष्य न दिखाए जाएं ।

 

 

;6द्ध  ;क द्धतंबाकू सेवन या धूम्रपान को बढ़ावा देने,न्यायोचित ठहराने या उसे गौरवान्वित करनेवाले दृष्य न दिखाए जाए ।

7   अषिष्टता,अष्लीलता और दुराचारिता द्वारा मानवीय संवेदनाओं को चोट न पहूॅचाई जाए

8   दो अर्थों वाले षब्द न रखे जाएं जिनसे नीच प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलता हो ।

9   महिलाओं के लिए किसी भी प्रकार का तिरस्कारपूर्ण या उन्हें बदनाम करने वाले दृष्य न दिखाए जाएं ।

10  महिलाओं के साथ लैंगिक हिंसा जैसे बलात्संग की कोषिष,बलात्संग अथवा किसी अन्य प्रकार का उत्पीड़न या इसी किस्म के दृष्यों से बचा जाना चाहिए तथा यदि कोई ऐसी घटना विषय के लिए प्रासंगिक हो तो ऐसे दृष्यों को कम से कम रखा जाना चाहिए और उन्हें विस्तार से नहीं दिखाना चाहिए ।

11  काम-विकृतियों दिखानेवाले दृष्यों से बचा जाना चाहिए । यदि विषयवस्तु के लिए ऐसे दृष्य दिखाना संगत हो तो इन्हें कम से कम रखा जाना चाहिए और इन्हें विस्तार से नहीं दिखाया जाना चाहिए।

12  जातिगत,धार्मिक या अन्य समूहों के लिए अवमाननापूर्ण दृष्य प्रदर्षित या षब्द प्रयुक्त नहीं किए जाने चाहिए।

13  सांप्रदायिक,रूढ़िवादी,अवैज्ञानिक या राष्ट््रविरोधी प्रवृत्तियों को दिखानेवाले दृष्यों या षब्दों को प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

14  भारत की प्रभुसत्ता और अखंड़ता पर संदेह व्यक्त नहीं किया जाना चाहिए ।

15  ऐसे दृष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने चाहिए जिनसे देष की सुरक्षा जोखिम या खतरे में पड़ सकती हों ।।

16  विदेषों से मैत्रीपूर्ण संबंधों में मनोमालिन्य नहीं आना चाहिए ।

17  कानून व्यवस्था खतरे में नहीं पड़नी चाहिए ।

18  ऐसे दृष्य या षब्द नहीं प्रस्तुत किए जाने चाहिए जिससे किसी व्यष्टि या व्यष्टि निकाय या न्यायालय की मानहानि या अवमानना होती हो

व्याख्याः ऐसे दृष्य जिनसे नियमों के प्रति घृणा,अपमान या उपेक्षा पैदा हो या जो न्यायालय की प्रतिष्ठा पर आघात करें न्यायालय की अवमानना के अंतर्गत आएंगे ।

19  संप्रतीक और नाम का ;अनुचित प्रयोग निवारणद्ध अधिनियम 1950 ;1950 का 12द्ध के

उपबन्धों के अनुरूप से अन्यथा राष्ट््रीय चिह्न और प्रतीक न दिखाए जाए । 3.      फिल्म प्रमाणीकरण बोर्ड यह भी सुनिष्चित करेगा कि:-

1   फिल्म का मूल्यांकन उसके समग्र प्रभाव को दृष्टि में रखकर किया गया है और

2   उस फिल्म पर उस काल, देष की तत्कालीन मर्यादाओं और फिल्म से संबंधित लोगों को ध्यान में रखते हुए विचार किया गया है परन्तु फिल्म दर्षकों की नैतिकता को भ्रष्ट न करती हो।

4.    ऐसी फिल्में , जो उपर्युक्त मापदण्डों पर खरी उतरती हो, किन्तु अवयस्कों को दिखाए जाने के लिए अनुपयुक्त हों, केवल वयस्क दर्षकों को प्रदषर््िात करने के लिए प्रमाणित की जाएंगी ।

5.    ;1द्ध   निर्बाध सार्वजनिक प्रर्दषन के लिए फिल्मों को प्रमाणित करते समय बोर्ड यह सुनिष्चित करेगा कि फिल्म परिवार के साथ देखने योग्य है अर्थात फिल्म ऐसी होनी चाहिए जिसे परिवार के सभी सदस्य जिसमें बालक है, के साथ बैठकर देखा जा सकता हो ।

2. फिल्म के स्वरूप, विषय वस्तु और उद्धेष्य को देखते हुए यदि बोर्ड का यह मत हो कि माता-पिता/अभिभावकों को सावधान करना ज़रूरी है कि क्या बारह वर्ष से कम आयु के बच्चे को यह फिल्म दिखाई जाए तो निर्बाध सार्वजनिक प्रर्दषन के प्रमाणीकरण करते समय इस आषय का पृष्ठांकन किया जाएगा ।

3   यदि फिल्म के स्वरूप, विष्य वस्तु और उद्धेष्य को  ध्यान मं रखते हुए बोर्ड का यह मत

हो कि फिल्म का प्रर्दषन किसी व्यवसाय विषेष के सदस्यों या किसी वर्ग विषेष के व्यक्तियों तक सीमित रखा जाना चाहिए तो फिल्म सार्वजनिक प्रर्दषन के लिए बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट विषिष्ट दर्षकों तक सीमित रखने के लिए प्रमाणित की जाएगी ।

6.    बोर्ड फिल्मों के षीर्षको की बड़े ध्यान से जांच करके सुनिष्चित करेगा कि ये षीर्षक उत्तेजक, अष्लील, आक्रामक अथवा उपर्युक्त मापदण्ड़ों में से किसी मानदण्ड का उल्लंघन न करते हो ।